महाविद्यालय बिलाईगढ़ में राष्ट्रीय वेबीनार का हुआ आयोजन।

बिलाईगढ़– शासकीय शहीद वीर नारायण सिंह महाविद्यालय बिलाईगढ़ में हिंदी विभाग द्वारा हिंदी के अमर गीतकार “कवि प्रदीप के गीतों में राष्ट्रीय चेतना” विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। इस वेबीनार में भारत के विभिन्न राज्यों हरियाणा, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, गुजरात आदि राज्यों से प्रतिभागी के रूप में 280 लोगों ने पंजीयन कराकर ऑनलाइन माध्यम से अपनी सहभागिता दी। इस वेबीनार में बीएससी की छात्रा प्रेमशिला एवं एमए हिंदी की पिपेश्वरी, मनीषा आदि ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर और महाविद्यालय के प्राचार्य तथा विभाग अध्यक्ष हिंदी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ उमाकांत मिश्र ने आमंत्रित अतिथियों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कर महाविद्यालय परिवार की ओर से हार्दिक स्वागत किया। कार्यक्रम का उद्घाटन भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश की माननीय कुलपति प्रोफेसर मांडवी सिंह द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन भाषण में कुलपति महोदया ने संगीत, नृत्य, गीत आदि को एक दूसरे से जोड़ते हुए गीतकार कवि प्रदीप के गीतों में राष्ट्रीय चेतना पर सारगर्भित प्रकाश डाला। विषय वस्तु पर प्रकाश डालते हुए डी ए वी बोकारो, झारखंड के पूर्व व्याख्याता एवं संकाय प्रधान डॉ मणिकांत मिश्र ने हिंदी साहित्य में गीत परंपरा का उल्लेख करते हुए कवि प्रदीप के गीतों में देशभक्ति, गीत तत्व एवं राष्ट्रीय चेतना के व्यवहारिक पक्षों को उद्घाटित किया। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, छत्तीसगढ़ के सहायक प्राध्यापक डॉ गिरजा शंकर गौतम ने आधुनिकता के दौर में फिल्मी दुनिया से प्रभावित आज की पीढ़ियों को कवि प्रदीप के देशभक्ति पूर्ण गीतों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। आंध्र प्रदेश के शासकीय डीके महिला महाविद्यालय नेल्लूर के सहायक प्राध्यापक डॉ एस सुरेंद्र ने अपने वक्तव्य में कवि प्रदीप से जुड़े अनेक अछूते पक्षों को उजागर किया, उन्होंने देशभक्ति गीत को स्वर में गाकर ऑनलाइन जुड़े समस्त प्रतिभागियों को भाव विभोर कर दिया। महात्मा गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय फतेहपुर, उत्तर प्रदेश के सहायक प्राध्यापक डॉ राजेश कुमार यादव ने कवि प्रदीप के गीतों में मौलिक जनवादी और समसामयिक तथ्यों का उद्घाटन विवेचना पूर्वक किया। शहीद पद्मधर सिंह शासकीय स्वशासी पीजी कॉलेज सतना, मध्यप्रदेश से एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अखिलेश मणि त्रिपाठी ने अपने मौलिक एवं सारगर्भित वक्तव्य में हिंदी के कवि महाप्राण निराला और कवि प्रदीप की रचनाओं में समानता दिखलाई देती है इस पर विस्तार से चर्चा की, उन्होंने कवि प्रदीप के संदेश को उद्घाटित किया कि हमारा राष्ट्र भारत सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीयता अथवा जागृति की दृष्टि से कभी पराजित नहीं हुआ। कवि प्रदीप को निराला का उद्गार और जागृत समीक्षा के रूप में मूल्यांकित किया जाना चाहिए।
मगध विश्वविद्यालय बोधगया, बिहार से प्राध्यापक डॉ उमाशंकर सिंह ने कवि प्रदीप के सहृदय व्यक्तित्व और उनके गीतों में समाहित राष्ट्रीय चेतना पर मौलिक चिंतन के साथ प्रकाश डाला। अन्याय के खिलाफ हमेशा बोलते रहने वाले कवि प्रदीप स्वयं स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया, लाठियां खाई फिर भी अपने गीतों में अक्षर अक्षर भाव को प्रकाशित कर आम जनमानस में रस बरसाते रहे और जगत का कंठहार बन गए। बिलासपुर छत्तीसगढ़ से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ देवधर महंत ने कवि प्रदीप के गीतों पर विवेचन करते हुए उनकी तुलना भारतीय आत्मा माखनलाल चतुर्वेदी से की तथा उन पर पर्याप्त शोध की संभावनाओं को उल्लेखित किया। शासकीय जी एन ए पीजी कॉलेज भाटापारा, छत्तीसगढ़ के हिंदी विभाग के विभाग अध्यक्ष श्री राजेश कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि फिल्मी जगत में निर्देशक हिमांशु के कहने पर उन्होंने अपना लंबा नाम श्री रामचंद्र नारायण द्विवेदी की जगह पर छोटा नाम कवि प्रदीप रखा उनकी रचनाओं में जन-जन की भावना और संवेदनाओं का समाहार मिलता है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के व्याख्याता डॉ कुमुद रंजन ने फीडबैक देते हुए उत्कृष्ट और सफल आयोजन के लिए आयोजकों का धन्यवाद दिया। उन्होंने सभी वक्ताओं को एक से बढ़कर एक बताते हुए अपने हृदय के उद्गार को व्यक्त किया। अध्यक्षीय वक्तव्य में संस्था के प्राचार्य डॉ उमाकांत मिश्र ने कवि प्रदीप के छात्र जीवन, वैवाहिक प्रकरण आदि को उद्घाटित करते हुए उनके राष्ट्रीय चेतना के गीतों की कोटियां गिनायी। देशभक्ति परक, वीर रस के ओज पूर्ण गीतों के अतिरिक्त श्रृंगारिक, करुण, भजन परक, व्यंग्यात्मक, चटपटे और प्रेरणास्पद गीतों के उदाहरण प्रस्तुत किये। हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के, इंसान का हो इंसान से भाईचारा, ऐ मेरे वतन के लोगों, हवा तुम धीरे चलो, देख तेरे संसार की हालत आदि उनके प्रमुख गीतों का उदाहरण प्राचार्य द्वारा प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभागाध्यक्ष श्रीमती सुनीता विक्रम कोशले ने अपने छात्र जीवन के अनुभव द्वारा यह बतलाया कि आज के इस राष्ट्रीय वेबीनार से यह स्पष्ट हो गया कि पारिवारिक और राष्ट्रीयता की धारा को संतुलित रूप में एक साथ प्रवाहित करने में कवि प्रदीप सफल नायक के रूप में हमें प्रेरणा देते हैं। महाविद्यालय के प्राचार्य की इस अनूठी पहल, कार्यक्रम के संचालक शोधार्थी श्री दीपक तिवारी और विद्वतापूर्ण सारगर्भित उद्गार की अभिव्यक्ति के लिए समस्त अतिथि वक्ताओं के प्रति महाविद्यालय परिवार की ओर से आभार एवं साधुवाद व्यक्त किया। महाविद्यालय में पहली बार आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार में समस्त महाविद्यालय परिवार का अभूतपूर्व योगदान देखा गया। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा लिया।